परिचय



शिक्षक होने के नाते समाज से हमारा गहरा सरोकार है और हम समझते हैं कि हमारा दायित्व समाज में व्याप्त असमानताओं व शोषण के खिलाफ उठ रही आवाजों में अपनी आवाज मिलाना हैं। भारतीय समाज में महिलाओं, दलितों, आदिवासियों एवं अन्य मेहनतकश वर्गों के विरुद्ध शोषण व उत्पीडन की व्यवस्था लगातार बनी हुई है। भारत के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को जल, जंगल और जमीन के किसान-मजदूर-आदिवासी संघर्षों के सन्दर्भ से काटकर नहीं समझा जा सकता है। वर्तमान राजनैतिक सामाजिक व ऐतिहासिक परिस्थितियों के सन्दर्भ में हम आरक्षण की व्यवस्था का समर्थन करते हैं साथ ही साम्प्रदायिकता को हम देश की सांस्कृतिक समरसता व मानवाधिकार के लिए खतरा मानते हैं।
 हम इन असमानताओं के विरुद्ध लड़ने और एक समतामूलक समाज के निर्माण में अपनी हिस्सेदारी निभाने की कोशिश करेंगे। न्याय, समता, भ्रातृत्व और स्वतंत्रता संवैधानिक आदर्श हैं। हम इनका दायरा बढाने के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को अपना समर्थन व सहयोग देंगे। 

हम निम्न मूल्यों में विश्वास रखते हैं:
समता - लैंगिक व अन्य
लोकतांत्रिकता - व्यवहार व निर्णय प्रक्रिया में
पारदर्शिता- समाज के प्रति जवाबदेही, पेशागत स्वायत्तता के साथ
अंतरात्मा की गरिमा - विश्वासों की निजता
इह्लौकिकता व तार्किकता - सार्वजानिक तंत्र में
पंथनिरपेक्षता - सार्वजनिक व्यवस्था में
समाजवाद- शिक्षा व्यवस्था में मुनाफाखोर, निजी, दान संस्थाओं व एन. जी. ओ के हस्तक्षेप का विरोध
सहजता- स्कूलों में गैर प्रतिस्पर्धी, सहयोगधर्मी संस्कृति को प्रोत्साहन
संवाद- अभिभावकों, पडोसी क्षेत्र व व्यवस्था के साथ

उपरोक्त उद्देश्यों के सन्दर्भ में, विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में हम भिन्न मुद्दों पर अध्ययन समूह, पर्चा, पोस्टर, फिल्म प्रदर्शनी, शोध कार्य, ज्ञापन, पत्रिका आदि को माध्यम बनायेंगे और प्रयासरत रहेंगे की सांझी सोच रखने वाले साथियों को जोड़ें व उनके साथ जुड़ें तथा असहमत साथियों के साथ संवाद जारी रखें.

हम आपसे अपील करते हैं कि आप अपने सवालों, प्रतिक्रियाओं, आलोचनाओं व सुझाओं के द्वारा इस मुहिम का हिस्सा बनें. 

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